अध्याय 5: स्याही का काला सच आर्यन की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। 'स्याही' गाँव का वह खौफनाक सन्नाटा अब हवेली के अंदर एक गूँजती हुई चीख में बदल चुका था। जैसे ही उसने 'अटारी' (Attic) का दरवाज़ा खोला, उसे लगा जैसे वह वक्त के किसी पुराने हिस्से में पहुँच गया हो। वहाँ चारों तरफ पुरानी कड़ियों से लटकी हुई जंजीरें थीं और फर्श पर वही 'स्याही' जैसा काला गाढ़ा तरल पदार्थ फैला था, जो दीवारों से धीरे-धीरे रिस रहा था। कमरे के बीचों-बीच एक बड़ा आदमकद आईना रखा था, लेकिन उसमें धूल नहीं थी—वह आईना चमक रहा