भाग 2: मीलों की दूरियाँ, शब्दों के पुलमुंबई की मॉनसून वाली बारिश शुरू हो चुकी थी। जब आसमान से पानी की बूंदें गिरतीं, तो शहर की रफ्तार और भी पागलपन भरी हो जाती। लेकिन भार्गव के लिए यह बारिश अब वैसी नहीं थी जैसी पिछले साल थी। अब वह खिड़की के पास बैठकर बारिश को देखते हुए अक्सर यह सोचता कि क्या यूपी के उस छोटे से शहर में भी ऐसी ही बारिश हो रही होगी? क्या रूपा भी अपने घर की बालकनी में खड़ी होकर मिट्टी की सोंधी खुशबू को महसूस कर रही होगी? दो अलग दुनिया का जुड़ावभार्गव और