पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 3

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ऑफिस में आज फिर सन्नाटा था…सिर्फ दो लोग थे कृष्णा… और सिद्धिका।सिद्धिका टेबल के पास खड़ी थी…लैपटॉप पर कुछ देख रही थी।उसके लंबे बाल कंधों पर बिखरे थे…और वही रहस्यमयी खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी। तभी पीछे से किसी ने उसे धीरे से बाहों में भर लिया। सिद्धिका एक पल के लिए सन्न रह गई…लेकिन अगले ही सेकंड उसे एहसास हो गया… ये कृष्णा था।अजीब बात ये थी वो चाहती तो एक झटके में उसे दूर धकेल सकती थी…या उसी पल उसका खून पी सकती थी…लेकिन…उसने कुछ नहीं किया। वो बस चुप खड़ी रही…क्योंकि उस स्पर्श में