जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग मानते थे कि यह सिर्फ़ देवताओं की भूमि नहीं, बल्कि अधूरी आत्माओं का भी ठिकाना है। गाँव में जब भी किसी पर “छाया” पड़ती, लोग एक ही नाम लेते "पंडित चक्रधर जोशी।"चक्रधर जोशी उस इलाके के प्रसिद्ध बजरिया (ओझा) थे। भभूत, मंत्र और देव-आह्वान से वे ऐसी शक्तियों को भी शांत कर देते थे, जिनसे आम लोग डरकर भाग जाते। उम्र ढलने