पवित्र प्रेम या अभिशाप ? - 2

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उस रात के बाद सब कुछ बदल गया था…सिद्धिका अपने ठिकाने पर लौट चुकी थी…लेकिन इस बार वो शांत नहीं थी। उसकी कलाई अब भी जल रही थी…जहाँ कृष्णा के लाल धागे का स्पर्श हुआ था।वो गुस्से में चीज़ें तोड़ने लगी और बोली—एक साधारण इंसान… मुझे रोक गया?उसकी आँखें लाल हो गईं…लेकिन इस बार गुस्से के साथ कुछ और भी था डर और शायद… थोड़ा सा आकर्षण भी। उसे समझ नहीं आ रहा था क्यों वो कृष्णा के पास जाते ही कमजोर पड़ गई।दूसरी तरफ…कृष्णा पूरी रात सो नहीं पाया। उसने जो देखा था… वो उसकी समझ से बाहर था।