घर में हल्की रोशनी है।हर कमरा अपने अंदर एक दर्द छुपाए हुए है।तीनों अलग-अलग जगह… पर तीनों के दिल एक ही जैसे टूटे हुए। KABIR’S ROOMकबीर खिड़की के पास बैठा है।बाहर रात का सन्नाटा…अंदर उसकी साँसों में घुटन।उसकी आँखों से आँसू टपकते हैं—पर वो हर बार हाथ से जल्दी पोंछ देता है।जैसे खुद को ही धोखा दे रहा हो।(वॉइसओवर – कबीर) —मैं मज़बूत दिखता हूँ…पर सच ये है कि मैं कभी था ही नहीं मज़बूत।भैया… श्रेया…मैं तुम दोनों को खोना कभी नहीं चाहता था।कबीर धीरे से तकिये में चेहरा छुपाकर रो पड़ता है।पर उसकी सिसकियां इतनी दबा दी गई हैंकि कोई