मुंबई से यूपी तक: एक अनकहा सफर - भाग 1

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भाग 1: नीली स्क्रीन का जादूमुंबई की शामें कभी शांत नहीं होतीं। मरीन ड्राइव पर टकराती लहरों का शोर हो या लोकल ट्रेन की वो अंतहीन जद्दोजहद, यहाँ सुकून तलाशना रेत में सुई ढूँढने जैसा है। भार्गव, जो अंधेरी के एक छोटे से फ्लैट में अपनी लैपटॉप स्क्रीन के सामने बैठा था, उसके लिए भी सुकून एक विलासिता थी। वह पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था, जिसकी दुनिया कोड की लाइनों और डेडलाइन के बीच सिमटी हुई थी।एक रात, जब थकान आँखों पर भारी थी, भार्गव ने आदतवश अपना फेसबुक फीड स्क्रॉल करना शुरू किया। तभी 'सजेस्टेड फ्रेंड्स' की लिस्ट