जहाँ सब कुछ धीरे-धीरे सामान्य होने लगा था…घर में फिर से हल्की हँसी सुनाई देने लगी थी…ऑफिस में काम पटरी पर आ रहा था…वहीं, एक सुबह सब कुछ फिर बदल गया।ऑफिस – दोपहरउस दिन सृष्टि office नहीं गई थी। कबीर गया था। कबीर मीटिंग में था। फोन साइलेंट पर। अचानक उसका असिस्टेंट घबराया हुआ अंदर आया।असिस्टेंट बोला - Sir… मैम का फोन आ रहा है… बार-बार।कबीर का दिल धक से रह गया। उसने तुरंत कॉल उठाई। दूसरी तरफ सृष्टि की टूटी हुई साँसें थीं।सृष्टि बोली - कबीर जी…उसकी आवाज़ काँप रही थी।वो बोली - घर के बाहर… मीडिया है…और… और…कबीर बोला - और क्या?वो