ऑफिस का मेन गेट। रात के 11:15 बज चुके हैं। बाहर तेज़ हवा चल रही है, बिजली चमक रही है। कृषांत अपनी गाड़ी से उतरता है, मोबाइल कान से लगाए हुए।कृषांत (फोन पर, गुस्से में) बोला - क्या? तुम लोगों ने उसे ऊपर भेज दिया?!तुम सबको दिमाग नहीं है क्या!वो तेजी से अंदर जाता है। कैमरा उसके पीछे चलता है।ब्रेक रूम का दरवाज़ा खुलता है — अंदर सन्नाटा छा जाता है।श्रव्या के दोस्त — साक्षी, विवेक, अनुज, और कामिनी — सबका चेहरा पीला पड़ा हुआ है।कृषांत (कठोर स्वर में) बोला - कहाँ है श्रव्या?कोई जवाब नहीं देता। साक्षी के हाथ काँप रहे