ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = धारण करो, स्थिर रखो, नियंत्रित करो। भावार्थ (सरल हिन्दी में)“अपने मन और बुद्धि को स्थिर, संयमित और एकाग्र रखो।” गहरी व्याख्या--यह छोटा-सा वाक्य बहुत गहरा योगिक और आध्यात्मिक संदेश देता है: मन चंचल होता है, हर समय इधर-उधर भटकता है।धारण (धारणा) का अर्थ है — मन को एक बिंदु पर टिकाना।यही आगे चलकर ध्यान (Meditation) की नींव बनता है।यह मंत्र हमें सिखाता है कि:बाहरी परिस्थितियों से विचलित न हों।अपनी बुद्धि को स्पष्ट और स्थिर रखें।निर्णय शांत मन से लें। आध्यात्मिक संकेत--यह शिक्षा