अपूर्ण शिक्षा :- एक घातक परिणाम

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सत्-चरित्र: सृष्टि का मूल अस्तित्वक्या आपने कभी गंभीरता से विचार किया है कि किसी समाज, राष्ट्र या सम्पूर्ण सृष्टि का आधार क्या है?क्या केवल विज्ञान, तकनीक और विकास ही मानवता को स्थिर रख सकते हैं?उत्तर है—नहीं।किसी भी समाज का वास्तविक अस्तित्व तीन मूल स्तंभों पर टिका होता है—शिक्षा, दीक्षा और सुविवाह।प्राचीन आर्य भारत ने इन तीनों को केवल समझा ही नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारा।यही कारण था कि उस समय समाज में चरित्र, संतुलन और उच्च चेतना विद्यमान थी।परंतु आज की स्थिति भिन्न है।आज शिक्षा तो है, परंतु वह भी अपूर्ण है—क्योंकि उसमें केवल जानकारी है, जीवन का