कुम्भन कहता है --> ये मुझे ञात नही मित्र परतुं इस समय हित और अहित की चितां का नही है। जब रक्षा कवच टुटा तब मैने फिर से चुपचाप इस जंगल से बाहर आकर मणी की खोज करने लगा । ताकी किसी को भी ये आभास ना हो के रक्षा कवच टुट चुकी है और मैं जंगल से बाहर आ गया हूँ । परतुं मित्र मेरा ये प्रयत्न भी विफल रहा क्योकीं उस दिन मेला मे एक छोटे बालक ने मुझे देख लिया और मेरे आंखो को खेलने का वस्तु समझ कर मेरे आंख पर कुछ दे मारा तब मैं