आश्रम में पुनः वापसीबालक प्रह्लाद आचार्य शंड के साथ पुनः आश्रम में वापस आ गए थे। यहाँ वे आचार्यों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा को बड़े ध्यान से ग्रहण करने लगे। इस बार प्रह्लाद के व्यवहार को देखकर आचार्यों को लगने लगा कि अब प्रह्लाद में काफी परिवर्तन आ गया है, किंतु कोई भी इस बात से परिचित नहीं था कि प्रह्लाद हर समय, हर क्षण अपने इष्टदेव के ध्यान में लीन रहते है।पहले की अपेक्षा प्रह्लाद सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों में अधिक रुचि लेने लगे थे। यही कारण था कि आचार्यों को यह विश्वास हो चला था कि