राज-ए-खंडहर: श्रापित विरासत - 3

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अध्याय 3: तहखाने का राज़ और श्रापित डायरी ​आर्यन की सांसें फूल रही थीं। हॉल का दरवाजा किसी ने बाहर से बंद नहीं किया था, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे दीवारों ने ही उसे अपनी जकड़ में ले लिया हो। उसने अपने कैमरे की लाइट चारों तरफ घुमाई, लेकिन अंधेरा रोशनी को निगल रहा था। तभी उसकी नज़र फर्श पर पड़ी एक अजीब सी चीज़ पर गई। एक पुराना, पीतल का छल्ला (ring) जो ज़मीन पर एक खुफिया दरवाज़े (trapdoor) से जुड़ा था। ​आर्यन ने हिम्मत जुटाई और उस छल्ले को ज़ोर से खींचा। एक भारी पत्थर की सिल