सर्पदंश का प्रहारजब प्रह्लाद नदी की विकराल लहरों के पाश से भी बच गया तो मंत्रियों की सलाह के अनुसार उसे पुनः राज्य में लाया गया। राज्य भर में प्रहलाद के ही नाम का शोर-शराबा था। एक के बाद एक चमत्कार के कारण उसकी लोकप्रियता बढ़ गई थी अथवा यह कहें कि जिधर से भी निकलो, वहीं प्रह्लाद के चर्चे आम तौर पर सुने जा सकते थे।प्रह्लाद हिरण्यकशिपु के लिए गले की फाँस बन गए थे, जो एक प्रकार से प्रतिदिन पीड़ा दे रही थी। वह इस प्रह्लाद रूपी फाँस को निकाले भी कैसे? वह तरह-तरह के प्रयास करके थक