शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (89)

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                                यादों की सहेलगाह - प्रकरण 89          " मैं एक लेखक था, यह जानकर उस ने मेरा सन्मान किया था."           " मैं उस वक़्त वेश्या के बारे में सर्वे कर रहा था.  यह जानकर वह प्रभावित हुई थी. उस ने मुझे न्योता दिया था."           " भैया! आप को हमारे बारे में क़ोई भी जानकारी चाहिये तो इस बहन के पास आना. मैं आप की मदद करूंगी. "            "जाते जाते उस ने अपनी कहानी बयान की थी:'            " वह राजस्थान की रहने वाली थी.. वह चार बहने थी. वह