शाहद की गुड़िया - प्रकरण 87 " सुकू! शहद की गुड़िया का दावा करती थी . प्यार होने का ढिंढोरा पिटती थी. बाहों में कस कर भर लो हर मेसेज में कहती थी लेकिन सच्चाई बताने का कोई सौजन्य नहीं दर्शाया था. " " ऊस का दिन में मेंरे मेसेज के सामने दस मेसेज आते थे जो रूह, धड़कन और मुझे अपनी बाहों में कस कर भर लो, वोही बातें दोहराते थे. जो छोटा बच्चा भी ना माने वो बातें मुझ से करती थी और एहसास की बातें भी दोहराती थी. "