शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (85)

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                            शहद की गुड़िया- प्रकरण 85.           " मानवीय रिश्ते में दादू को सम्पूर्ण विश्वास था. उन के दिल में सब के प्रति प्यार उमड़ता  था. कभी किसी से उन्होंने नफ़रत नहीं की  थी. यह उन की सब से बड़ी उपलब्धि थी."          " बिभूति  इतना दूर होते हीं अपने बारे में सभी बात कभी टेलिफोन पर तो कभी वॉट्स अप के जरिये करती रहती थी. दादू भी अपनी सभी बातें शेयर करते थे.. "           " वह एक लेखक थे, कहानिया लिखते थे..यह बात उसे बताई थी. यह जानकर