वह इतना तेजी से घुम रहा था के उसके घुमने से हवा मे सांय सांय जैसी आवाज आने लगता है और फिर वो खोपड़ी अचानक से रुक जाता है और कुंम्भन के मुख के पास आकर जोर जोर से खोफनाक हसी से हंसने लगता है और बोलने लगता है। > हा हा हा हा ....! महाराज कुंम्भन की सेवा मे नारंग देत्य प्रस्तुत है मेरे मालिक ! क्या हुआ मेरे मालिक ! आपने मुझे क्यो याद किया ? आप मुझे सिघ्र ही बताए मैं आपका सेवा करने के लिए व्याकुल हो रहा हूँ मालिक । बताईए मैं आपकी क्या सेवा कर