दक्षराज अघोरी बाबा से कहता है--> ठिक है ठिक है आप पहले सांत हो जाईए और आप अंदर आईए हम आराम से बात करते है। आप भी काफी थके हुए से लग रहे हैं । आइए अंदर आइए। इतना बोलकर दक्षऱाज दयाल और अघोरी बाबा अदर चला जाता है। मातंक और त्रिजला ये सब दैख रहा था । त्रिजला कहती है --> स्वामी अब ये मानव कौन है जो इस प्रकार से विलाप कर रहा था और ये दक्षराज इतना दयालु कैसे हो गया जो उस मानव को अपने हवेली के अंदर ले कर चला जाता है।त्रिजली की बात पर मांतक