सुबह की हल्की धूप शहर की इमारतों पर फैलने लगी थी. रात की बारिश के बाद मौसम ठंडा और ताजा लग रहा था.सावी केयर Hospital में रोज की तरह चहल- पहल शुरू हो चुकी थी. मरीजों की भीड, नर्सों की भागदौड और डॉक्टरों की बातचीत से पूरा अस्पताल जीवंत लग रहा था.लेकिन तीसरी मंजिल के एक प्राइवेट कमरे के बाहर असामान्य सन्नाटा था.दरवाजे के बाहर चार आदमी खडे थे. काले कपडे, सख्त चेहरे और चौकन्नी नजरें. अस्पताल के स्टाफ को समझ आ गया था कि यह कोई साधारण मरीज नहीं है.कमरे के अंदर बिस्तर पर रुद्राक्ष शेखावत आधा लेटा हुआ