रात की रानी - भाग 1

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रात का आखिरी पहर था।घर के बाहर नीम का पेड़ सन्नाटे में खड़ा था — जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा हो। अंदर से एक स्त्री की दबी हुई कराह आती, फिर चुप हो जाती। दीया टिमटिमा रहा था, जैसे उसकी भी हिम्मत जवाब दे रही हो।फिर एक रोने की आवाज़ आई।नई, कोमल, काँपती हुई।गाँव की दाई नीलम काकी ने बच्ची को गोद में उठाया और हाँ भरी साँस ली। बच्ची के चेहरे पर एक अजीब रोशनी थी — जैसे पूर्णिमा की रात का चाँद किसी के माथे पर उतर आया हो। आँखें अभी बंद थीं, पर उन बंद