एपिसोड 4: गंगा घाट का टकरावसूरज धीरे-धीरे गंगा के पानी में डूब रहा था। हवा में ठंडक और हल्की नमी थी। रिया और आरव घाट की सीढ़ियों पर बैठे थे। दोनों के बीच खामोशी थी, लेकिन दिलों में तूफ़ान। तभी पीछे से आवाज़ आई – “रिया जी!” राजेश खड़ा था। उसके चेहरे पर दृढ़ता और आंखों में सवाल। आरव तुरंत खड़ा हुआ। “तुम?” राजेश ने सीधा कहा, “हाँ, मैं। रिया जी से शादी की बात चल रही है। और आप… आप कौन?” आरव ने गहरी सांस ली। “मैं आरव हूं। और रिया मेरी ज़िंदगी है।” हवा में तनाव भर गया। रिया बीच में खड़ी थी