अशोक उन दोनो को दैखकर खुश हो जाता है और भगवान से कहता है --अशोक :- हे भगवान , इन दोनो का ये प्यार बना रहे , जानवी को उसकी याददाश्त लोटा दो प्रभु ।आदित्य जानवी को लेकर अंदर जाता है और उसे सौफे पर बिठा देता है और कहता है --आदित्य :- तुम यहां पर बैठो , मैं तुम्हारे लिए कुछ बनाकर ले आता हूँ ।आदित्य किचन के अंदर चला जाता है , आदित्य जानता था— ये पल सच नहीं है। ये नशे का असर है। वो ये भी जानता था— सुबह होगी, तो वही जानवी उससे दूरी बनाएगी,