. यादों की सहेलगाह - प्रकरण 78 " जिस तरह वह सुशील भाई से एडजस्ट पाते थे प. वही नाथालाल उन के बेटो के साथ था. उन्हें तैयार थाली में खाना मिला गया था. धंदे के उत्थान के लिये उन्हों ने क़ोई सक्रिय प्रयास नहीं किया था." " उन के दादा ने जो कहां था वह सच ही था." " जो महेनत मैंने धंधा जमाने के लिये की थी उस से आधी मेहनत मेरे बेटों ने नहीं की हैं और उन के बेटे