शहद की गुड़िया- प्रकरण 72 "पिताजी का मुंबई से दूर अहमदाबाद में निधन हुआ था, उस पर लोगो को अचरज हुआ था. वह 90 के करीब पहुंच गये थे. फिर भी ज़ब चाहा तब बिना कुछ कहे, बताये निकल पड़ते थे. रास्ते में कहीं कुछ हो गया तो? उस के बारे में सोचना जरूरी नहीं समझा था. उन्हें इतनी बड़ी दुनिया में कहाँ तलाशना.? यह मेरी समस्या थी. " "वह पुरे दिन कुछ ना कुछ टोपिक पकड कर आरती के साथ उलझते रहते थे. कुछ ना कुछ टिप्पणी करते रहते थे. बच्चों का दिमाग़ भी खाते बैठते थे. वह