शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (70)

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                                शहद की गुड़िया - प्रकरण 70          "अहमदाबाद पहुंचते पहुंचते सुबह हो गई थी. हमारे पहुंचने तक उन लोगो को पिताजी को कम से कम 40 घंटे मृत देह को घर में रखना पड़ा था. उस वजह से क़ोई दो रात सो नहीं पाया था."          " पिताजी के चचेरे भाई ने उन्हें सवाल किया था."          " आप को फ्लाइट में आ जाना चाहिये था.. "          " उस की बात सही थी. ऐसी परिस्थिति में हवाई जहाज ही विकल्प बचा था . जिसे उन की तात्कालिन आर्थिक परिस्थिति इजाजत