-------------------लाईब्रेरि से निकल कर चारू सीधा अपने डोर्म चली गई। पिछले एक हफ्ते से वो अकेली ही रह रही थी। क्योंकि अमोघ नैना के साथ ही रहना चाहता था । चारू समझती थी उसका डर! उसकी प्रवाह! और उसे विश्वास हो गया था कि अमोघ नैना से सच मे प्रेम करता है! चारू ने कमरे मे आते ही अपना बैग एक ओर फेंका और खुद बेड पर कूद गई। उसने अपना चेहरा तकिए मे छुपा लिया और पूरे बिस्तर पर गोल गोल घुमने लगी । " आआआआआ!!!!!!!!!!", चारू अपना चेहरा तकिए मे छुपाते हुए हल्के से चिल्लाई। उसे बार बार प्रोफेसर अमर