--------------------रात का समय था। नैना अभी भी सो रही थी। उसके सिराहने बैठा अमोघ सन्न था। उसके हाथ मे पकडा कागज हवा के कारण फडफडा रहा था। उसकी आंखे खाली थी और चेहरे पर कोई भाव नही था। तभी दरवाजा खुला और चारू , शशांक और नव्या ने कमरे मे प्रवेश किया। चारू की आंखे लाल और सुजी हुई थी। वो लंबे लंबे डग भरते हुए बिस्तर के पास पहुंची और नैना के पैरो के पास बैठ गई। उसने बिस्तर पर सोती हुई नैना के देखा। एक बार फिर उसकी रुलाई फुट पडी। " तू इतनी प्रॉब्लम मे थी और बताई भी