श्रापित एक प्रेम कहानी - 67

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वर्शाली हैरानी से कहती है -- आपके घर ?एकांश कहता है -- हां मेरे घर । एकांश उत्साह से कहता है-- हां वर्शाली ! तुम्हें दैख कर मा पापा भी बहोत खुश हो जाएगें। और मुझे भी तुम्हारे साथ रहने का कुछ पल और मिल जाएगा। इसी तरह तुम मुझे हर्शाली के बारे मे भी बता देना। एकांश की बात पर वर्शाली अपनी हामी भरते हुए कहती है-- ठीक है एकांश जी । जैसी आपकी ईच्छा। वर्शाली के मुह से इतना सुनते ही एकांश खुशी से झुम उठता है। वर्शाली हर्शाली के पास जाती है और हर्शाली सके माथे पर प्यार से अपना