1 जनवरी 2002…सर्दी की वह सुबह…जब पूरा शहर नए साल की उमंग और खुशियों में डूबा था।घर का फोन बार-बार बज रहा था।रिश्तेदार, दोस्त, जान-पहचान वाले… सभी अपनी शुभकामनाएँ भेज रहे थे।लेकिन महक…हर बार जब फोन की घंटी बजती… उसकी धड़कनें तेज़ हो जातीं।उसे सिर्फ एक ही नाम की उम्मीद होती…"देव…"हर बार जब फोन उठाती… और दूसरी तरफ से किसी और की आवाज़ सुनती…तो उसकी आँखों में एक पल के लिए नमी उतर आती।सच तो यह था…इस नए साल में उसे सिर्फ एक ही तोहफा चाहिए था—देव की आवाज़।पिछले कुछ हफ्तों से उसके दिल में एक अजीब-सी खाली जगह बन