कितनी खूबसूरत जगह हैं

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हम लोग अनुवाई जी के साथ चल दिए। जहाँ खाना बँट रहा था, उस स्थान पर पहुँचे तो देखा कि खाना लेने के लिए एक लंबी लाइन लगी थी।​वहाँ लोग एक-एक करके खाना निकाल रहे थे। बहुत से पकवान बनाकर रखे गए थे और उनकी खुशबू हमें अपनी ओर खींच रही थी। प्रियांशी ने धीरे से अंकिता से कहा— "अंकिता, हमें भी लाइन में लगना होगा। हाथों में प्लेट लेकर चलते हुए खाना होगा, लेकिन ऐसे खाने में मज़ा बहुत आएगा।"मस्ती भरे अंदाज़ में अंकिता बोली— "हाँ भाभी! आज तो यहाँ खाने में मज़ा आएगा ही। चलो, जल्दी से चलकर