Part 9: दूरियाँ जो पास ले आईंकुछ वादे ऐसे होते हैं…जो निभाए जाते हैं, मगर जीने नहीं देते।उस रात के बाद सब कुछ बदल गया था।कबीर और Myra… दोनों अपने-अपने रास्तों पर लौट गए थे।मगर दिल… दिल वहीं अटका हुआ था, उसी मोड़ पर जहाँ उन्होंने एक-दूसरे को खो दिया था।---तीन दिन बीत चुके थे।कबीर ने उस गली का रुख नहीं किया।ना ही Myra ने कोई कोशिश की।मगर दोनों के बीच जो खामोशी थी…वो किसी चीख से कम नहीं थी।कबीर अपने कमरे में था।फोन उसके सामने पड़ा था…मगर वो उसे छू भी नहीं रहा था।उसके दिमाग में सिर्फ एक बात