Part 3: नाम जो दीवार बन गयारात बीत चुकी थी, मगर कबीर की आँखों से नींद कोसों दूर थी।सुबह की हल्की रोशनी कमरे में दाखिल हो रही थी, लेकिन उसके भीतर अब भी वही अँधेरा था… वही सवाल, जो रात से उसका पीछा कर रहे थे।“Myra…”उसने फिर से उसका नाम धीरे से दोहराया।एक अजनबी लड़की…एक खतरनाक जगह…और वो अजीब सा एहसास, जो उसे अब तक महसूस हो रहा था।कबीर ने अपने बालों में हाथ फेरा और बिस्तर से उठ गया।वो खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था कि ये सब एक इत्तेफाक था…मगर उसका दिल मानने को तैयार नहीं