दुश्मनी के दरमियान इश्क ( भाग-2)

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Part 2: सच का पहला वारदरवाज़ा जैसे ही ज़ोर से खुला, कमरे की खामोशी एक झटके में टूट गई।भारी कदमों की आवाज़, साथ में हथियारों की हल्की झनकार… और कुछ ऐसे चेहरे, जिन्हें देखकर ही समझ आ जाए कि वो मज़ाक करने नहीं आए।कबीर ने पलटकर दरवाज़े की तरफ देखा।तीन आदमी अंदर आए थे। उनकी आँखों में सख्ती थी, और चेहरे पर वही ठंडा गुस्सा… जो सिर्फ दुश्मनी में दिखता है।“Myra…”उनमें से एक ने कड़े लहज़े में उसका नाम लिया।Myra का चेहरा सख्त हो गया।वो एक कदम पीछे हटी, मगर उसकी नज़रें कबीर से हट नहीं रही थीं।“तुम यहाँ क्या