भक्त प्रह्लाद - 13

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भयानक लहरों के बीचबार-बार हिरण्यकशिपु प्रह्लाद को क्षति पहुँचाने की कुचेष्टा करता और बार-बार प्रह्लाद अपने आराध्य देव भगवान् विष्णु की कृपा से प्रत्येक संकट से बाहर निकल आते। अपने गलत इरादों में असफल होने के बाद भी हिरण्यकशिपु को सीख नहीं मिली थी कि यह सब भगवान् विष्णु की ही कृपा है, जो प्रह्लाद प्रत्येक संकट से बचे हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता था, मानो भगवान् विष्णु नहीं, बल्कि प्रह्लाद उसके परम शत्रु हों। उसकी सभी कोशिशें धूल में मिल गई थीं। वह किसी भी प्रकार से प्रह्लाद का बाल भी बाँका नहीं कर सका था।हिरण्यकशिपु, जिसने तीनों लोकों