धुंधली यादें: एक अधूरी दास्तान - भाग 3

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धुंधली यादें: एक अधूरी दास्तान भाग 3: विरासत की पहली झलकसमय की अपनी एक अलग रफ़्तार होती है। दिल्ली के 'द रस्टिक कैफे' की मेज अब पुरानी पड़ चुकी थी, दीवारों पर पेंट की परतें चढ़ चुकी थीं, लेकिन आर्यन और मीरा के लिए वह जगह आज भी वैसी ही थी। अब उनके साथ दस साल की 'इंतज़ार' भी थी, जो अपनी स्केचबुक में कैफे के कोने-कोने को उकेर रही थी।इंतज़ार में मीरा की एकाग्रता और आर्यन की तकनीकी बारीकी का अद्भुत संगम था। वह केवल चित्र नहीं बनाती थी, वह चित्रों में कहानियाँ बुनती थी।"पापा," इंतज़ार ने अचानक अपनी