अध्याय 2: हवेली की दीवारों के राज़आर्यन ने हवेली के भारी-भरकम लोहे के दरवाज़े को धक्का दिया। दरवाज़ा एक ऐसी चीख के साथ खुला जैसे कोई सदियों से दर्द में कराह रहा हो। अंदर घुसते ही एक ऐसी ठंडी और नमी वाली हवा का झोंका उसके चेहरे से टकराया, जिसने उसके खून को जमा दिया। उस हवा में मिट्टी, सड़ी हुई लकड़ी और पुराने कागज़ों की एक अजीब सी महक थी। आर्यन ने अपना कैमरा निकाला और उसकी पावरफुल एलईडी लाइट ऑन की। रोशनी का घेरा जैसे ही विशाल हॉल में फैला, आर्यन की धड़कनें रुक सी गईं। हॉल इतना