एक बड़ी कंपनी थी जहाँ काम से ज़्यादा लोगों की कहानी चलती थी सुबह से शाम तक मशीनें कम और लोगों के दिल ज़्यादा धड़कते थे हर कोई अपने-अपने सपनों के पीछे भाग रहा थाउसी भीड़ में एक लड़की थी जो काम से ज़्यादा मुस्कान के लिए जानी जाती थी उसकी हँसी इतनी साफ थी जैसे बारिश के बाद का आसमानलोग कहते थे कि वो लड़की नहीं चलती-फिरती खुशी है लेकिन उसके दिल में एक खाली जगह थी जिसे वो खुद भी नहीं समझती थी फिर एक दिन कंपनी में एक नया लड़का आया एंट्री ऐसी जैसे फिल्म का हीरो