यात्री ने लंबी सांस खींचते हुए कहा,“देखो बेटी! यह नन्ही-सी बच्ची नशीले पदार्थ बेच तो रही है, लेकिन सिर्फ इसलिए ताकि इसे एक वक्त की रोटी नसीब हो सके। इसे इस दलदल में धकेला गया है, इसने खुद यह रास्ता नहीं चुना।”मैंने सहमति में सिर हिलाते हुए कहा,“बेशक! आपकी बात सही है। इस मासूम बच्ची को क्या मालूम कि वह जो बेच रही है, वह कितनी खतरनाक चीज है? उसने यह काम अपनी मर्जी से शुरू नहीं किया होगा, बल्कि किसी न किसी ने उसे जरिया बनाया होगा।”मेरी बात सुनकर प्रियांशी भी चुप न रह सकी, वह बोल पड़ी,“हाँ! यह