सन 1921 की बात है। गंगा के किनारे बसे एक छोटे से कस्बे के बाहर एक पुराना श्मशान था, जिसे लोग “मसान” कहते थे। दिन में भी वहाँ सन्नाटा रहता था, और रात में तो कोई उस तरफ देखने की हिम्मत तक नहीं करता था। कहा जाता था कि वहाँ सिर्फ मरे हुए लोग नहीं, बल्कि अधूरी इच्छाएँ भी भटकती हैं।उस कस्बे में एक आदमी रहता था, नाम था हरिराम। वह एक साधारण किसान था, लेकिन उसकी जिंदगी में एक गहरा दुख था। उसका छोटा बेटा अचानक बीमार पड़कर मर गया था। हरिराम उस दुख को सह नहीं पाया। वह