नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी दुनिया में फैल चुकी थी। हर देश में लोग हथियारों की जगह किताबों की ओर बढ़ रहे थे। पृथ्वी सुबह बच्चों के बीच खड़ा था। उनकी हँसी और पढ़ाई की आवाज़ें उसे सुकून दे रही थीं। सनाया पास आई और बोली, “अब हमें इस यात्रा को एक स्थायी समापन देना है। यही हमारी असली जिम्मेदारी है।” पृथ्वी ने दृढ़ता से कहा, “हाँ। अब विश्वास का समापन लिखना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इसे नई शुरुआत मानें।” ---शिक्षा का स्थायी समापनटीम ने शिक्षा अभियान को स्थायी रूप से स्थापित करने का निर्णय