काया ने महसूस कर लिया था कि भूपेंद्र पिछले कुछ दिनों से उखड़ा-उखड़ा रहता है। उसके चेहरे की हवाइयाँ और उसकी चुप्पी काया को आशंकित कर रही थी। उसे लगा कि शायद वंशिका की याद या घर के वकील के बढ़ते खर्चे के कारण आई तंगी भूपेंद्र को उससे दूर कर रही है। उसने अपनी पकड़ मज़बूत करने के लिए एक नया और घातक उपाय सोचा। वह बाज़ार गई और अपनी मर्यादा की बची-कुची कतरनें भी बेच आई। उसने अपने लिए ऐसी फ्रॉक खरीदी जो किसी भी सभ्य घर के आंगन में तबाही लाने के लिए काफी थी।घर आकर जब