डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 35

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अगली सुबह जब सूरज की रोशनी उस घर की खिड़कियों से टकराई, तो वंशिका के लिए वह घर अब घर नहीं, बल्कि एक कुरुक्षेत्र बन चुका था। महिमा और शबनम के समझाने के बाद, वंशिका ने अपने आँसू पोंछ लिए थे। उसके चेहरे पर अब वह बेचारगी नहीं थी, बल्कि एक बर्फीली खामोशी थी जो किसी बड़े तूफान के आने का संकेत दे रही थी। वह एक टैक्सी लेकर वापस उस घर पहुँची। जैसे ही उसने घर के भीतर कदम रखा, उसे अपनी ही मेहनत से सजाई हुई चीज़ें अब पराई लगने लगीं।हॉल में भूपेंद्र और काया पहले से ही