चुपके-चुपके आऊँगा - भाग 13

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मैं रात भर इन्हीं बातों को सोचता रहा… और सोचते-सोचते कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला। (अगले दिन) सुबह मैं गहरी नींद में सोया हुआ था, तभी प्रियांशी मेरे पास आ गई और मुझे जगाने लगी। लेकिन मैं इतनी गहरी नींद में था कि मुझे कुछ पता ही नहीं चल रहा था। वह मेरी चादर खींच रही थी… फिर भी मैं नहीं जागा। तभी अंकिता हँसते हुए बोली— “प्रियांशी, ये ऐसे नहीं उठेगा… लो पानी, इसके ऊपर डाल दो… तुरंत उठ जाएगा!” फिर क्या था… प्रियांशी ने सच में पानी लेकर मेरे ऊपर डाल दिया!  मैं झटके से