सन 1897 की बात है। नदी के किनारे बसा छोटा सा गांव अजीब डर के साए में जी रहा था। हर शाम सूरज ढलते ही लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते, क्योंकि रात के बाद उस नदी के पास कोई नहीं जाता था। कहते थे वहां एक अधूरी आत्मा भटकती है, जो अपने अधूरे संस्कारों के कारण इस दुनिया में अटकी हुई है।उस गांव में गोविंद नाम का एक युवक रहता था, जो शहर से पढ़कर लौटा था और इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। उसे लगता था कि यह सब अंधविश्वास है। एक दिन उसने ठान