धुंधली यादें: एक अधूरी दास्तान (भाग 2)अध्याय 1: 'इंतज़ार' की पहली किलकारीदिल्ली की सर्दियों की एक ठंडी सुबह थी। खिड़की के कांच पर ओस की बूंदें जमी थीं, जो बाहर के नज़ारे को धुंधला बना रही थीं। आर्यन कमरे में रखे ईज़ल के पास खड़ा था, लेकिन उसके हाथ में आज आर्किटेक्चरल रूलर नहीं, बल्कि एक छोटा सा ऊनी मोजा था। पालने में सो रही नन्हीं 'इंतज़ार' की सांसों की लय कमरे की खामोशी को एक संगीत दे रही थी।मीरा धीरे से कमरे में आई, उसके चेहरे पर थकान के बावजूद एक अलौकिक सुकून था। "आर्यन, तुम फिर से उसे