चैत्र माह में जैसे मौसम कुछ ठंडा कुछ गरम रहता हैं ऐसे ही कुछ है ये किस्सा, मैं मेरठ से ग्वालियर अपने बी.ए. के पेपर होने के बाद नानी के घर छुट्टियों के लिए ट्रेन से सफर करने जा रहा था। उस दिन ट्रेन में बैठने के लिए कुछ देर लेट हो गया था क्योंकि माँ ने पूरी तलने में अधिक समय लगा दिया था। मैंने तो उनसे मना किया कि कोई जरूरत नही खाने की परंतु वह कहाँ मेरी सुनने वाली। जैसे तैसे करके मैं गतिमान बन, एक अटैची, राई के आलू और कुछ पूरी लिए स्टेशन पहुँचा। स्टेशन