उस रात जब पहली बार उस पुराने स्कूल के दरवाजे अपने आप खुले, तो हवा में कुछ ऐसा था जो सांस को भारी कर दे। जैसे कोई अदृश्य नजरें अंधेरे में छिपकर हर आने वाले को देख रही हों।गांव के लोग सालों से उस स्कूल के पास भी नहीं जाते थे, पर मैं वहां पहुंच गया था, क्योंकि मुझे यकीन नहीं था कि कोई इमारत सिर्फ डर की वजह से इतनी बदनाम हो सकती है।वह स्कूल बहुत पुराना था। दीवारों पर जमी काई, टूटी खिड़कियां और धूल से भरी कक्षाएं। जैसे समय यहां आकर रुक गया हो। मैंने जैसे ही