उस रात गाँव के ऊपर एक अजीब सन्नाटा छाया हुआ था। हवा भी जैसे थम सी गई थी, और दूर मंदिर की टूटी घंटियों की धीमी आवाज अंधेरे में गूंज रही थी। लोगअपने दरवाजे जल्दी बंद कर चुके थे, क्योंकि अमावस्या की रात थी और इस रात के बारे में पुरखों ने हमेशा एक ही चेतावनी दी थी, “अगर कोई तुम्हारा नाम पुकारे, तो जवाब मत देना।” लेकिन चेतावनियाँ अक्सर उतनी ही डरावनी होती हैं जितनी उन्हें अनदेखा करने की जिज्ञासा।बंगाल के उस छोटे से गाँव में हर कोई निश्चि डाक के बारे में जानता था। कहते थे, वह रात के